Ambaji Mandir ke Prasaad Ka Ek Bada Farziwada

गुजरात के प्रसिद्ध Ambaji Mandir ke Prasaad Ka Ek Bada Farziwada सामने आया है। आरोप है कि एक कंपनी ने ‘अमूल’ लेबल वाले नकली घी को उनके डिब्बों में डालकर इस्तेमाल किया था। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।

गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर का प्रसाद बनाने वाली कंपनी के खिलाफ एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया है। आरोप है कि यह कंपनी ‘अमूल’ के डिब्बे में नकली घी का इस्तेमाल कर रही थी, जिसका प्रयोग प्रसाद बनाने के लिए किया जाता था। मामला बनासकांठा जिले का है जो कि गुजरात के अंबाजी मंदिर के धार्मिक मेले के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर में धार्मिक मेले के दौरान भक्त आते हैं।

इन भक्तों के लिए ‘प्रसाद’ तैयार करने के लिए एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस ने बताया कि गुजरात खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (GFDCA) ने अंबाजी मंदिर में आरोपी फर्म द्वारा सप्लाई किए गए घी के सैंपल एकत्र किए थे, जिनमें घी की गुणवत्ता स्टैंडर्ड से बाहर थी।

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Prasaad Ka Ek Bada Farziwada: आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

जब गुणवत्ता परीक्षण में सैंपल फेल पाए गए, तो पुलिस ने 28 अगस्त को कार्रवाई की और 8 लाख रुपये के 2,820 किलोग्राम मिलावटी घी जब्त की। इस मामले में साबरकांठा जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड (Sabar Dairy) ने कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है, जिसका कहना है कि कैटरिंग फर्म और कुछ अज्ञात लोगों ने साबर डेयरी के नाम पर घी के डिब्बे में डुप्लीकेट लेबल लगाकर इस्तेमाल किया।

Prasaad Ka Ek Bada Farziwada: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 482, और 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया है, और इसे सीबीआई के तहत जांच जारी है।

ट्रस्ट ने प्रसाद बनाने का दिया था ठेका

संघ ने बताया कि उन्होंने अंबाजी मंदिर के लिए प्रसाद तैयार करने का ठेका दिया था, और उन्होंने किसी भी अवैध गतिविधि का समर्थन नहीं किया था।

GCMMF के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने बताया कि महासंघ से संबद्ध कोई भी डेयरी संघ इस तरह की अवैध गतिविधियों में लिप्त नहीं है और अमूल घी बाजार में प्रामाणिक और उच्च गुणवत्ता वाला है।

GFDCA आयुक्त एचजी कोशिया ने बताया कि कैटरिंग फर्म को अरासुरी अम्बाजीमाता देवस्थान ट्रस्ट की तरफ से प्रसाद तैयार करने का ठेका दिया गया था, लेकिन उन्होंने गुणवत्ता कंट्रोल करने के लिए सैंपल्स लिए थे और उन्होंने देखा कि घी गुणवत्ता के मानकों को पूरा नहीं कर रहा है।

8 लाख रुपए का नकली घी बरामद

करवाई के दौरान पुलिस ने 8 लाख रुपये की 2,820 किलोग्राम मिलावटी घी जब्त किया जो मंदिर के प्रसाद के लिए जाने वाला था। यह घातक घी फर्जीवाड़ा न केवल भक्तों के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी उद्दंड करता है। इस मामले में अब आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है और जांच जारी है।

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